अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण में उप-वर्गीकरण (सब कैटेगराइजेशन) पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ भारत बंद का आह्वान हुआ है.
आइए आपको बताते हैं कि क्या है पूरा मामला जिसके कारण भारत बंद का आवाह्न किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने 1 अगस्त को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण पर बड़ा फैसला दिया था. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि राज्यों को आरक्षण के लिए कोटा के भीतर कोटा बनाने का अधिकार है यानी राज्य सरकारें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों के लिए सब कैटेगरी बना सकती हैं. इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत अनुसूचित जातियों पर भी उसी तरह लागू होता है, जैसे यह ओबीसी पर लागू होता है. कोर्ट के इस फैसले का बसपा सुप्रीमो मायावती समेत तमाम नेता विरोध कर रहे हैं.
बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने X पर लिखा है कि आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एससी/एसटी समाज में काफी गुस्सा है. अदालत के फैसले के विरोध में हमारे समाज ने 21 अगस्त को भारत बंद का आह्वान किया है.

भारत बंद के दौरान कौन सी सेवाएं बंद रहेंगी और कौन सी चालू रहेंगी, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इस बंद के कारण सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर असर पड़ सकता है, और कई प्राइवेट दफ्तरों के बंद होने की संभावना है। साथ ही, आपातकालीन सेवाएं जैसे अस्पताल और एम्बुलेंस पूरी तरह से चालू रहेंगी। इस बीच, बैंकों और सरकारी दफ्तरों के बंद रहने की स्थिति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
