सुनीता विलियम्स: अंतरिक्ष की वो योद्धा जिसने तारों को छुआ

Sunita Williams Khabritota.in Sunita Williams to return in 2025
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क्या आप जानते हैं कि किसी ने अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ी है? हां, यह सच है! सुनीता विलियम्स ने यह अद्भुत कारनामा किया। वे सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्री नहीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने असंभव को संभव बना दिया।

सुनीता का जीवन एक रोमांचक कहानी है जो धरती से लेकर तारों तक फैली हुई है। आइए जानते हैं कैसे एक साधारण लड़की ने असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं और दुनिया को दिखाया कि सपने कितने भी बड़े क्यों न हों, उन्हें पूरा किया जा सकता है।

सुनीता विलियम्स का जीवन एक रोमांचक यात्रा है जो धरती से अंतरिक्ष तक फैली हुई है। क्या आप जानते हैं कि उन्होंने अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ी थी? यह सिर्फ एक उदाहरण है कि कैसे सुनीता ने असाधारण उपलब्धियों को साधारण बना दिया।

19 सितंबर 1965 को ओहायो के यूक्लिड में जन्मी, सुनीता का बचपन मैसाचुसेट्स के नीधम में बीता। भारतीय और स्लोवेनियाई वंश की सुनीता ने अपनी विरासत को हमेशा सम्मान दिया है, यहां तक कि अंतरिक्ष में भी।

उनकी शिक्षा की नींव मजबूत थी। 1987 में उन्होंने यू.एस. नेवल अकादमी से भौतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की। लेकिन वे यहीं नहीं रुकीं। 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग प्रबंधन में मास्टर्स डिग्री भी हासिल की। यह शैक्षिक पृष्ठभूमि उनके भविष्य के करियर के लिए एक मजबूत आधार साबित हुई।

सुनीता का नौसेना में करियर शानदार रहा। 1989 में वे नेवल एविएटर बनीं और हेलीकॉप्टर कॉम्बैट सपोर्ट स्क्वाड्रन 8 में सेवा दी। उन्होंने कई विदेशी तैनातियों में हिस्सा लिया और राहत कार्यों में भी योगदान दिया, जिसमें हरिकेन एंड्रयू के दौरान किया गया काम शामिल है। 1993 में वे नेवल टेस्ट पायलट स्कूल से ग्रेजुएट हुईं। 30 से अधिक विमानों में 3,000 से ज्यादा उड़ान घंटे उनके अनुभव का प्रमाण हैं।

लेकिन सुनीता का सपना धरती से परे था। 1998 में NASA ने उन्हें अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना। यह उनके जीवन का एक नया अध्याय था। उनका पहला अंतरिक्ष मिशन 2006 में STS-116 था। इसके बाद 2012 में सोयुज TMA-05M मिशन आया। इन मिशनों ने सुनीता को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर ले जाया, जहां उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए।

सुनीता ने अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा समय बिताने वाली महिला का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने सात स्पेसवॉक किए, जो किसी महिला द्वारा किए गए सबसे अधिक स्पेसवॉक हैं। कुल मिलाकर, उन्होंने स्पेसवॉक में 50 घंटे 40 मिनट बिताए, जो एक महिला द्वारा स्पेसवॉक में बिताए गए सबसे लंबे समय का रिकॉर्ड है।

लेकिन सुनीता की उपलब्धियां यहीं नहीं रुकतीं। उन्होंने अंतरिक्ष में कुछ ऐसा किया जो किसी ने सोचा भी नहीं था। उन्होंने अंतरिक्ष में एक ट्रायथलॉन पूरी की और बोस्टन मैराथन में भी हिस्सा लिया। यह दिखाता है कि सुनीता के लिए कोई सीमा नहीं है, चाहे वह पृथ्वी पर हो या अंतरिक्ष में।

सुनीता का अंतरिक्ष सफर अभी भी जारी है। वर्तमान में, वे बोइंग स्टारलाइनर मिशन के हिस्से के रूप में ISS पर हैं। यह मिशन फरवरी 2025 तक चलने वाला है। इस मिशन के साथ, सुनिता का कुल अंतरिक्ष समय 424 दिनों से अधिक हो जाएगा

सुनीता की उपलब्धियों ने उन्हें कई सम्मान दिलाए हैं। उन्हें नेवी कमेंडेशन मेडल, नेवी और मरीन कॉर्प्स अचीवमेंट मेडल, और हयुमैनिटेरियन सर्विस मेडल से सम्मानित किया गया है। NASA ने भी उनके योगदान को मान्यता दी है।

लेकिन सुनीता का प्रभाव सिर्फ उनके पदकों और रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। वे STEM क्षेत्रों में महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हैं। उनकी कहानी दिखाती है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कोई भी अपने सपनों को हासिल कर सकता है, चाहे वे सपने कितने भी बड़े क्यों न हों।

सुनीता का जीवन हमें सिखाता है कि सीमाएं सिर्फ हमारे दिमाग में होती हैं। वे हमें याद दिलाती हैं कि हम अपनी कल्पना से परे जा सकते हैं। चाहे वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ना हो या नए ग्रहों की खोज करना, सुनीता विलियम्स ने दिखाया है कि कुछ भी असंभव नहीं है।

आज, जब हम तारों की ओर देखते हैं, तो हम जानते हैं कि वहां एक भारतीय मूल की महिला है जो हमारे लिए नए रास्ते खोल रही है। सुनीता विलियम्स की कहानी हमें याद दिलाती है कि हमारे सपने हमें कहीं भी ले जा सकते हैं, यहां तक कि अंतरिक्ष में भी।

सुनीता का सफर जारी है, और हम उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं कि वे आगे क्या करेंगी। एक बात तय है – चाहे वह धरती पर हों या अंतरिक्ष में, सुनीता विलियम्स हमेशा नए आयाम तय करती रहेंगी और दूसरों को प्रेरित करती रहेंगी।

चार महीनों से धरती से दूर सुनीता और विल्मोर, फरवरी में लौटेंगें वापस, जानिए इतने समय तक स्पेस में रहने से हेल्थ पर क्या पड़ेगा असर

Sunita Williams Return: आठ दिनों के लिए सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन दोनों यात्री स्पेस में फंस गए हैं। अब उन्हें वापस धरती पर लाने के लिए नासा स्पेसएक्स क्रू-9 मिशन लॉन्च करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। अंतरिक्ष यान को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से रात 10:47 बजे लॉन्च किया जाना है। इस मिशन की लाइव स्ट्रीमिंग भी की जाएगी।

पहले क्रू-9 मिशन को शुरू में 26 सितंबर को लॉन्च करने के लिए प्लान किया गया था, लेकिन फ्लोरिडा के खाड़ी तट पर तूफान हेलेन से मौसम की स्थिति काफी खराब हो गई थी। इसी वजह से मिशन को टाल दिया गया था। सुनीता और विल्मोर को वापस लाने के लिए नासा के निक हेग और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के कॉस्मोनॉट अलेक्जेंडर गोरबुनोव मिशन पर जाने वाले हैं।

सुनीता-बुच को हो सकती हैं ये समस्याएं

अगर बात करें अंतरिक्ष में लंबा समय बिताने से सुनीता-बुच के स्वास्थय पर क्या असर होगा तो, एक रिपोर्ट के अनुसार स्पेस में ग्रैविटी की कमी की वजह से दोनों की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। लंबा समय बिताने पर उनकी हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं। हर महीने उनकी हड्डियों का घनत्व 1% कम हो सकता है। जानकारी के लिए बता दें, बीते साल अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री फ्रैंक 371 दिन अंतरिक्ष में रहने के बाद वापस लौटे। फ्रैंक पर हुई शोध में पता चला कि वापस आने पर उन्हें नजर संबंधी समस्याएं, डीएनए में बदलाव, वजन में कमी और इम्यून सिस्टम में परिवर्तन देखने को मिला।

अंतरिक्ष से कब तक वापस आ पाएंगी सुनीता विलियम्स


भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर कई महीनों से अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं. नासा ने दोनों की वापसी के लिए अभियान चलाया था. जो कि सफल नहीं हो सका था. अब दोनों की वापसी फ़रवरी 2025 में होने की संभावना है. नासा के यह दोनों अंतरिक्ष यात्री स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से धरती पर वापसी करेंगे.

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