
ईरान(तेहरान)_ ईरान में विरोध प्रदर्शन अब हिंसक झड़प में बदल चूका हैं, यहाँ देश के कई हिस्सों में भारी तनाव हो गई हैं। झड़प की शुरुआत आर्थिक मुश्किलों और जीवनयापन की कठिनाइयों के खिलाफ हुई थी, लेकिन अब यह विरोध सीधे सरकार और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ उग्र हो गया है।
हिंसक प्रदर्शन में 217 लोगों की मौत! ईरान की राजधानी तेहरान के छह अस्पतालों के डेटा के आधार पर एक ईरानी डॉक्टर ने कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत होने का दावा किया है, जिनमें अधिकतर मौत गोली लगने हुई है। इसका सीधा संबंध सुरक्षा बलों की कड़ी प्रतिक्रिया से जोड़ा जा रहा है। हालाँकि कुछ मानवाधिकार समूहों के आंकड़े इससे कम (लगभग 60–65 मौतें) बता रहे हैं, लेकिन घटनाओं की गंभीरता और व्यापक हिंसा साफ़ दिखाई दे रही है।
हिंसक प्रदर्शन पूरे देश में फैला: प्रदर्शन अब केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहा, अब देश की 110 से ज्यादा शहरों में सरकार का विरोधी प्रदर्शन की जा रही हैं, जिनमें कई शहरों में हिंसक झड़पें, आगजनी और सांप्रदायिक चेतावनी वाले नारे भी सुनने को मील रहा है।
सेना ने दी चेतावनी और माता-पिता से की अपील:
ईरान के रिव़ोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और सुरक्षाबलों ने सख़्त संदेश जारी किया है जिसमें माता-पिता से कहा गया है कि वे बच्चों को प्रदर्शन से दूर रखें, और चेतावनी दी है कि अगर गोली लगती है तो शिकायत न करें। यह बयान सुरक्षा बलों की रणनीति और नियंत्रण के प्रति उनकी सख्ती को दर्शाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहले कुछ दिनों तक यह साफ नहीं था कि सरकार क्या रुख अपनाएगी। खुद एंटी राइट्स पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा बल भ्रम में हैं। किसी को ठीक से नहीं पता कि आगे क्या होने वाला है, लेकिन शुक्रवार को सामने आई खूनी तस्वीरों और सख्त बयानों से साफ हो गया कि अब पूरी ताकत का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इंटरनेट बंद और संचार भी बाधित हो गया है
इससे पहले सरकार ने देशभर में इंटरनेट और फोन सर्विस लगभग बंद कर दी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो ईरानी सरकार को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी
क्या कारण है विरोध का?
अर्थव्यवस्था में गिरावट, महंगाई, बेरोज़गारी तथा राजनीतिक नियंत्रण के खिलाफ बढ़ती नाराज़गी इस आंदोलन की मुख्य वजह बताई जा रही है। कई विश्लेषक इसे ईरानी शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर असंतोष के रूप में देख रहे हैं।
निष्कर्ष?
उनका कहना है कि अब जब प्रदर्शन मध्यम वर्गीय इलाकों तक फैल गए हैं, तो सरकार बेरहमी से कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी। सरकार का मानना है कि आने वाले दिनों में हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है। ईरान पहले से ही इजराइल के साथ संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, गिरती अर्थव्यवस्था, बिजली और पानी की किल्लत जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। सरकार के भीतर भी मतभेद हैं। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान सार्वजनिक तौर पर नरम रुख दिखा रहे हैं, लेकिन उनके कई मंत्री सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं। सरकार का आरोप है कि अमेरिका और इजराइल इन प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों में से कुछ ऐसे लोग है जो पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं, जिन्होंने विदेश से प्रदर्शन तेज करने की अपील की है। कुर्द इलाकों में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कई प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है।
ईरान में जारी प्रदर्शनों के दौरान मृतकों की संख्या और सेना की चेतावनी ने देश के हालात को गंभीर रूप दे दिया है। स्थानीय डॉक्टरों और समाचार एजेंसियों के मुताबिक हिंसा कई शहरों तक फैल चुकी है स्थिति आगे और बदतर हो सकती है यदि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव कम नहीं होता है तो।
