Google जैसी दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टेवयर कंपनी में, बिहार की बेटी को बड़ा पैकेज मिलने पर अलंकृता के परिजनों ने खुशी ज़ाहिर की है। अलंकृता को गूगल ने 60 रुपये सालाना का पैकेज दिया है। आइए उनके बारे में कुछ ख़ास जानते हैं।
गूगल में जॉब लगने से अलंकृता काफी खुश हैं, वहीं उनके मायके और ससुराल में खुशी की लहर है। उनका कहना है कि दुनिया की मशहूर सॉफ्टवेयर कंपनी गूगल में काम करना बहुत ही गर्व और हर्ष की बात है। खुशी हो रही है कि उनके परिवार के सदस्य भी गूगल में काम कर रहे हैं। दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी गूगल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रतिभा और मेहनत का कोई भी कद नहीं होता. संस्थान ने भारत की एक बेटी को बेहद शानदार पैकेज देकर कंपनी में नियुक्त किया है. दरअसल गूगल ने देश की बेटी अलंकृता साक्षी को गूगल ने 60 लाख रुपये के आकर्षक पैकेज पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया है.

अलंकृता साक्षी, भागलपुर जिले के नवगछिया के सिमरा गांव के निवासी शंकर मिश्रा की पुत्री हैं. वर्तमान में वे झारखंड के कोडरमा में रह रही हैं. अलंकृता की यह सफलता कई सालों की मेहनत और लगन का परिणाम है. गूगल में शामिल होने से पहले, अलंकृता ने बेंगलुरु में विप्रो, अर्न्स्ट एंड यंग और सैमसंग हार्मन जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में अनुभव प्राप्त किया था.
कब हुई थी शादी
अलंकृता का विवाह मनीष कुमार से 8 दिसंबर 2023 को हुआ था. उनके पति भी बेंगलुरु में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत हैं. अलंकृता का पैतृक घर नवगछिया के सिमरा गांव में है, जबकि वर्तमान में उनका परिवार झारखंड के कोडरमा जिले के झुमरी तलैया में निवास करता है.
कहां से की है पढ़ाई
अलंकृता की शिक्षा की यात्रा भी प्रेरणादायक रही है. उन्होंने अपनी 10वीं कक्षा कोडरमा से की, 12वीं जवाहर नवोदय विद्यालय कोडरमा से पूरी की और फिर हजारीबाग से बीटेक की डिग्री हासिल की. उनके परिवार में माता-पिता के अलावा दो बहनें और एक भाई भी हैं. उनकी मां रेखा मिश्रा एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं, जबकि पिता कोडरमा में एक प्राइवेट नौकरी करते हैं.
कोई भी सपना किया जा सकता है पूरा
गूगल में अलंकृता के चयन ने उनके परिवार में खुशी की लहर पैदा कर दी है. परिवार का कहना है कि यह न केवल एक व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह एक प्रेरणा भी है उन सभी लड़कियों के लिए जो अपने सपनों को साकार करने के लिए कठिन मेहनत कर रही हैं. अलंकृता की इस उपलब्धि से स्पष्ट है कि सही दिशा और समर्पण के साथ कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है.
